पर्यावरण के संरक्षण में समाज की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ0 आशाराम वर्मा असिस्टेण्ट प्रोफेसर, शिक्षा संकाय, डी0ए0वी0 पी0जी0 कॉलेज गोरखपुर (उ0प्र0) Author

Keywords:

तकनीकीकरण, पर्यावरणीय आपदा, अम्ल वर्षा, प्राकृतिक प्रदूषण

Abstract

सारांश : वर्तमान समय में औद्योगिक विकास, तीव्र तकनीकी प्रगति और बढ़ते मशीनीकरण ने मानव
जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण पर गंभीर दबाव भी बढ़ा है।
कारखानों एवं खदानों से निकलने वाला अपशिष्ट, समुद्र में तेल का रिसाव, वाहनों से उत्सर्जित
धुआँ तथा विभिन्न प्रकार के प्रदूषक पदार्थ वायुमंडल और प्राकृतिक संसाधनों को लगातार प्रभावित
कर रहे हैं। दूसरी ओर, उपभोक्तावादी जीवनशैली ने मनुष्य की आवश्यकताओं को बढ़ाकर प्राकृतिक
संसाधनों के अत्यधिक दोहन को प्रोत्साहित किया है। परिणामस्वरूप मानव और प्रकृति के बीच
स्थापित संतुलन धीरे-धीरे कमजोर हुआ है।पर्यावरणीय असंतुलन के कारण आज अनेक गंभीर
समस्याएँ सामने आ रही हैं। वैश्विक तापवृद्धि, ओजोन परत का क्षरण, अम्लीय वर्षा, वायु प्रदूषण,
बाढ़, सूखा, हिमनदों का पिघलना, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि तथा भूस्खलन एवं भूकंप जैसी प्राकृ
तिक एवं पर्यावरणीय घटनाएँ मानव जीवन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। इन परिस्थितियों से
स्पष्ट है कि प्रकृति के संसाधनों का अनियंत्रित और विवेकहीन उपयोग अंततः मानव समाज के
लिए ही संकट उत्पन्न कर रहा है। वर्तमान पर्यावरणीय संकट के संदर्भ में मानव और प्रकृति के
संबंधों पर नए सिरे से विचार करना आवश्यक हो गया है। केवल विकास की गति बढ़ाना पर्याप्त
नहीं है, बल्कि विकास की प्रक्रिया को पर्यावरण-संतुलित, टिकाऊ और उत्तरदायी बनाना भी जरूरी
है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरण के
प्रति जन-जागरूकता को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा। अतः आज मानव के
सामने सबसे महत्वपूर्ण दायित्व यह है कि वह प्रकृति के साथ संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व का
मार्ग अपनाए। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत,
सामाजिक और संस्थागत स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करना होगा। प्रकृति और
मानव के बीच संतुलित एवं सहजीवी संबंध स्थापित करके ही वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के लिए
सुरक्षित, स्वस्थ और सतत जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।

Author Biography

  • डॉ0 आशाराम वर्मा, असिस्टेण्ट प्रोफेसर, शिक्षा संकाय, डी0ए0वी0 पी0जी0 कॉलेज गोरखपुर (उ0प्र0)



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Published

2026-08-22

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How to Cite

पर्यावरण के संरक्षण में समाज की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन. (2026). RESEARCH INQUIRY, 1(1), 22-27. https://researchinquiry.com/index.php/ri/article/view/6