"कार्यशील दम्पत्तियों के बच्चों में व्यक्तित्व विकास : एक अध्ययन"
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पालन-पोषण##common.commaListSeparator## जीवन शैली##common.commaListSeparator## जीवन-परिवेश##common.commaListSeparator## देख-भाल##common.commaListSeparator## सामाजीकरणसार
सारांश-वर्तमान शोध कार्य का मुख्य लक्ष्य इस तथ्य की छानबीन करना है कि क्या दम्पत्तियों के
बालक के पालन-पोषण के व्यवहारों में भिन्नता के कारण बालक के व्यक्तित्व विकास को
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोंण से प्रभावित करती है। दम्पत्तियों के पालन-पोषण के व्यवहारों से सम्बन्धित
सूचनाओं को इकट्ठा करने हेतु एक प्रश्नावली का निर्माण किया गया और प्रयोग में लाया गया। यह
प्रश्नावली पालन-पोषण के तीन आयामों को सम्मिलित करती है, वे हैं-प्रतिबन्धक प्रवृत्ति,
पालन-पोषण तथा सामाजीकरण। एक बालक के स्वस्थ शारीरिक व मानसिक विकास हेतु बालक
को अनुशासित करना एक महत्वपूर्ण पहलू है, प्रत्येक दम्पत्ति बच्चों के प्रति अपने व्यवहार में उन्हें
अनुशासित करने हेतु प्रतिबन्धक होते हैं। अतः बालकों में अनुशासन को जमाने हेतु पालन-पोषण
के व्यवहारों में प्रतिबन्धक व्यवहार एक महत्वपूर्ण घटक होता है। इसी प्रकार देख-भाल भी
पालन-पोषण का एक महत्वपूर्ण पहलू है। देखभाल पालन-पोषण के व्यवहारों में बालक का ध्यान
रखने के पहलू को व्यक्त करता है। दम्पत्ति बालक की मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं,
जैसे भोजन देना, संरक्षण देना, स्वच्छता का ध्यान रखना, अध्ययन हेतु आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध
कराना तथा बालक की अन्य आवश्कताएं आदि। सामाजीकरण भी बालक के पालन-पोषण का एक
अन्य महत्वपूर्ण पहलू है।
संदर्भ
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