आधुनिक परिप्रेक्ष्य में महिला सशक्तिकरण

लेखक

  • पुष्पा कुशवाहा शोधार्थिनी, समाजशास्त्र विभाग, प्रो०राजेन्द्र सिंह(रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज ##default.groups.name.author##
  • डॉ० ज्योति गुप्ता असिस्टेंट प्रोफेसर(समाजशास्त्र), मदन मोहन मालवीय पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, कालाकांकर,प्रतापगढ़ (उ.प्र.) ##default.groups.name.author##

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आर्थिक सशक्तिकरण##common.commaListSeparator## राजनैतिक##common.commaListSeparator## आत्मसम्मान एवं आत्मविश्वास##common.commaListSeparator## मानसिकता

सार

सारांश : सशक्तिकरण का मूल आशय व्यक्ति को इतना सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है कि वह
अपने जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने में समर्थ हो सके। महिला सशक्तिकरण का
उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक तथा राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करना है, ताकि
उन्हें रोजगार, शिक्षा और आर्थिक प्रगति के समान अवसर प्राप्त हों। इससे महिलाएँ आत्मनिर्भर
बनने के साथ-साथ सामाजिक जीवन में स्वतंत्र रूप से भागीदारी कर सकती हैं और अपनी
क्षमताओं एवं आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। भारतीय समाज के
ऐतिहासिक विकास पर दृष्टि डालने पर स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक महिलाओं को विभिन्न
प्रकार की सामाजिक असमानताओं और भेदभाव का सामना करना पड़ा। पुरुपप्रधान सामाजिक
व्यवस्था के कारण महिलाओं की स्वतंत्रता एवं निर्णय लेने की क्षमता सीमित रही। भारतीय समाज
में सती प्रथा, पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह, बाल मजदूरी तथा लैंगिक हिंसा जैसी अनेक
कुरीतियों ने महिलाओं के विकास में बाधाएँ उत्पन्न कीं। यद्यपि समय के साथ इन कुप्रथाओं के
विरुद्ध सामाजिक एवं कानूनी स्तर पर प्रयास किए गए हैं, फिर भी इनके कुछ रूप आज भी समाज
में दिखाई देते हैं। महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भारत
सरकार तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा अनेक योजनाएँ और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा केंद्र सरकार की ओर से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला
हेल्पलाइन, उज्ज्वला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, महिला शक्ति केंद्र तथा प्रधानमंत्री कौशल
विकास योजना जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, कौशल-विकास और आर्थिक
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को अपने अधिकारों
के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी
है। देश के विभिन्न राज्यों में भी महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के
लिए अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों से महिलाओं में आत्मविश्वास, निर्णय
लेने की क्षमता, आर्थिक स्वतंत्रता तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिल रहा है। अतः महिला
सशक्तिकरण केवल महिलाओं के व्यक्तिगत विकास तक सीमित विपय नहीं है, बल्कि यह समानता,
सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की आधारशिला है। प्रस्तुत अध्ययन में महिला सशक्तिकरण
की अवधारणा, आवश्यकता, विभिन्न आयामों तथा इसके लिए संचालित योजनाओं का समग्र
अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

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प्रकाशित

2026-08-22

अंक

खंड

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