अमरकांत की कथा-शैली और उनके साहित्य में भारतीय जीवन-दृष्टि

लेखक

  • डॉ०सृष्टि कुशवाहा सहायक आचार्य 'हिन्दी' मदन मोहन मालवीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कालाकांकर प्रतापगढ़ ##default.groups.name.author##

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संवेदनशील##common.commaListSeparator## बेरोजगारी नैतिक संघर्ष##common.commaListSeparator## विडंबनाओं##common.commaListSeparator## सहिष्णुता

सार

सारांश : अमरकांत हिंदी कथा साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण लेखक हैं जिनकी रचनाओं में भारतीय
जीवन की सटीक और संवेदनशील चित्रण है। वे अपनी कहानियों में साधारण शब्दों से गहरी बात
कहते हैं, न कि कृत्रिम भाषा या जटिल शिल्प। यही उनका कथा-शिल्प का सबसे बड़ा गुण है।
अमरकान्त की कहानियों में ग्रामीण और निम्न-मध्यमवर्गीय जीवन का मूल स्वर भारतीयता है।
उनकी कथाओं का मुख्य विषय गरीबी, बेरोजगारी, पारिवारिक संबंध, नैतिक संघर्ष और मानवीय
संवेदनाएँ हैं।उनके पात्र साधारण हैं, लेकिन बहुत जीवंत हैं, और वे भारतीय समाज की वास्तविक
स्थिति को दिखाते हैं। "दोपहर का भोजन" और "जीवन और जोंक" जैसी कहानियाँ भारतीय
समाज की विडंबनाओं को आसानी से दिखाती हैं। उनकी कहानियों में स्पष्ट रूप से करुणा,
मानवीय भावना और सामाजिक दायित्व दिखाई देते हैं। अमरकान्त की कहानी मानवीय मूल्यों,
संघर्ष और सहिष्णुता को उजागर करती है। इसलिए वे हिंदी कहानी परंपरा में विशिष्ट हैं।

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संदर्भ

1. डॉ० विजयमोहन : कथा समय, पृ०-30.

2. महेश दर्पण : आजकल, अप्रैल 2014, पृ० 7.

3. डॉ० काशीनाथ सिंह : हिन्दुस्तान 18 फरवरी 2014

4. डॉ० विजय मोहन : कथा समय, पृ० 30.

5. प्रेमचन्द : कुछ विचार, पृ०-41.

6. डॉ० देवी सिंह अवस्थी : नयी कहानी : सन्दर्भ और प्रकृति, पृ० 50.

7. डॉ० बलराज पाण्डेय : कहानी आन्दोलन की भूमिका, पृ० 41.

8. वही पृo 42.

9. डॉ० देवीशंकर अवस्थी : नयी कहानीः सन्दर्भ और प्रकृति पृ०-50.

10. डॉ० बलराज पाण्डेय : कहानी आन्दोलन की भूमिका, पृ० 41.

11. वही पृo-42.

12. वही पृ० 169.

13. डॉ० श्याम सुन्दर दास : साहित्यालोचन, पृ०-259.

14. अमरकान्त की सम्पूर्ण कहानियां खण्ड एक, पृ० 57.

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प्रकाशित

2026-08-22

अंक

खंड

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